ऐ अम्मा

पोटली भर आस लिएँ दो आँखें
चल पडी थी जाने कहाँ
आज बस स्टाप के नीचे है बैठी
कल तक था  एक पेड के नीचे उसका ठांव
कहते है पता बताने वाले ने लिखा था सिर्फ राह का ही नाम
मन्जिल बताता तो यह पहुँच नही जाती?
अब बैठी है सडक पर आँखें बिछायें
जाने कब से जाने कब तक
बचपन मे अम्मा की कही बात याद आ गई
एक टोकरी मे सामान लाद कर जब वह बापू के पास जाने लगती
तो अम्मा  कहती- अरी लाडो एक टोकरी मे सब मत डाल
गिर गया तो सब एक साथ बिखर जाएगा
पर अम्मा की भी कोई सुनता है भला
वह वैसे ही भागती और जोर से कहती
हाँ हाँ अम्मा अगली बार
और हंस के निकल जाती
आई थी अम्मा कल रात सपने मे
बोली बहुत सह चुकी लाडो
आ, मेरे पास आजा, देख तो बाल कितने रूखे हो गए है
पर अम्मा की भी  कोई  सुनता है भला
सपने मे भी आस से भरी वो आँखें
फिर  जोर से बोली
हाँ हाँ अम्मा अगली बार ज़रा नाती को देख लू
पर जाने क्यों इस बार लाडो को हंसी नही आई
एक रोज बारिश मे कोई  पकडा गया एक पुरानी टूटी छत्री
तो पगली उसे अपना समझ कर बोली
तु क्यों नही जन्मा रे मेरी कोख से
कहाँ था अब तक, अरे भाग मत यहाँ आ
ऐसे ही जाने कितनी आँखें
जाने कितनी पोटली भर आस और आह लिए बैठी है
सोचती होगी आज तो ज़रूर आएगा कोई
और बोलेगा अरे अम्मा तू यहाँ?
कब से तलाश कर रह था तेरी
चल तेरा कमरा तैयार है
गरम खाना खा कर आराम कर
चल अम्मा
ऐ अम्मा, अम्मा, ऐ अम्मा
चारो तरफ भीड बस स्टाप के
सब आज बुला रहे है पर पोटली चुप
लगता है आज इन आँखो ने अम्मा की सुन ली
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23 responses

  1. aaj rula diya,ye haqikat hai,Visakhapatnam me aisi hi ek amma aas lagaye baithi hai.bahut satik kavita hai.

  2. मातृस्नेह को अत्यंत ही सहजता के साथ अभिव्यक्त करने में पूर्णरूपेण समर्थ रचना |

    अहसासों से परिपूर्ण कविता के लिये बधाईयाँ |

  3. बहुत सरल और मर्मस्पर्शी शब्दों मे अपने बुज़ुर्गों का सम्मान करने की प्रेरणा और सीख देती हुई एक बहुत ही बेहतरीन कविता है यह।

    सादर

    1. Yashwant ji aapka main jitna bhi dhanyavaad karu kam hii hoga…thank you so much for this shower

  4. maa ke prti komal ehsaaso ko ek saath sundar shabdo me piroya hai apne……

  5. बेहद मर्मस्पर्शी और हमारी किंकर्त्तव्यमूढ़ता को चुनौती देती रचना ..

  6. तु क्यों नही जन्मा रे मेरी कोख से
    कहाँ था अब तक, अरे भाग मत यहाँ आ………….वाह कितना ममत्व शब्दों में उंढेला है ….जो शब्द गरीब है पर ऊँचे शब्दों को ठेंगा दिखा गये …सिर्फ ममत्व का …जबरदस्त हाथी जेसा विशाल दिल जो है ममता का हर माँ में …जो दीखता नहीं …….क्यू लोग आमिर होते हुए भी ममत्व से गरीब बन जातें है…….क्यू …क्यू विधाता ????????

    1. Nirmal ji is kavita ko likhte waqt bahut royi thii aisa lag raha thha ki potli mujh mei sama gayi aur likhva rahi thhi apne dil ki baat
      aaj aap sab ka sneh mujhe phir vahi le gaya dhanyavaad

  7. bahut achhi kavita..abhi tak sharir me ek halchal si ho rahi hai…shayad ab aankhe na bhar aaye..:-(

  8. bahut hi sunder rachna aaj pehli baar aapke blog per aye hain ……………++++++++++++++++++++++++++++++++++++++++++++++++++++++

  9. कल 09/12/2011को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

  10. Dhanyawaad Yashwant ji aap jitna shabdo ke dhani hai utne hi man se bhi aap jis tarah se doosro ko bhii protsahit kar rahe hai its realy commendable

  11. आज आपकी यह पोस्ट नयी पूरनी हलचल पर पढ़ी पहली बार हुआ आपकी पोस्ट पर आना ,सचमुच दिल छु गई आज आपकी यह रचना, जीवन के सच को बहुत ही खूबसूरती से मांर्मिक भाव को देते हुए उकेरा है आपने बहुत-बहुत शुभकामनायें… समय मिले तो आयेगा कभी मेरी पोस्ट पर आपका स्वागत है। …

    1. Pallavi itne pyare comment ke liye bahut bahut dhanyawaad..
      kya aap mujhe apne blog ka link bhej sakti hai..aapke gravatar mei sirf gmail ka link hai

  12. भावमय करते शब्‍दों का संगम है आपकी इस अभिव्‍यक्ति में ।

  13. काश मेरे पास वो शब्द होते जो बोल पते के मैं क्या महसूस कर रही हूँ !
    ये कविता मात्र कविता नहीं , यह तो मानो आपने दिल ही खोल के रख़ दिया हो अम्मा का और उसकी बिटिया का !
    इतने भाव हैं इस रचना में के व्यक्त करना मुश्किल है |
    बहोत प्यारा और बहोत नेक लिखा है आपने !

शब्दों की झप्पी

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