फिर कभी

ये लकीरें जो अब शरीर से लिपटी रहती है
ऐसा लगता है जैसे
बूढ़ी दादी ने झुर्रियों का गहना पहन रखा है
कितनी कहानिया समेटे अपने तन पर
जाने इनमे कितनी हंसी,कितने आंसुओ
सवालों का हिसाब होगा
पूछो तो कहती है फिर कभी
एक एक झुर्री जैसे किताब का पिछला पन्ना
और इन्ही सलवटो मैं  है दो चुप सी आँखें
झुर्रिया जितनी बातूनी आँखे उतनी ही खामोश
कभी कभी किसी  अपने का फोन आता है तो
दिवाली के दिये की तरह इनमे भी रौशनी जगमगा उठती है
और रात होते होते फिर आज को पीछे छोड़ ये आखें खामोश हो जाती है
कभी कभी लगता है दादी के शरीर पर हर आज कल के लिए एक झुर्री छोड़ जाती है
कितना पूछा कुछ बताओ ना
पर हंस कर टाल ही जाती है
दादी के हर झुर्री समेट लू तो बड़ा उपन्यास बन जाए
दर्द का,ख़ुशी का,ठहाको और आंसुओ का
जाने कितनी मिन्नतों  शिकायतों का सागर होगा
पर पूछो तो कहती है……
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21 responses

  1. Bohot Umdaaa….beautifully written with expressive emotions of old age….

    और रात होते होते फिर आज को पीछे छोड़ ये आखें खामोश हो जाती है…….

    I’m amazed by it….much love…

  2. बेहतरीन प्रस्तुति सोमा जी, झुर्रियों में दादी के इतिहास है रचा….
    बखूबी आपने है उससे पढ़ा …..

  3. Bahut khub Soma,kash in jhurriyon ki kahani koi pad pata. kitni khushi,kitne peeda,na jane kya kya chhupa rahata hai. Khatte meethe anubhavon ki potli. Bahut sundarta se bayan kiya hai.

    1. Thanks Ma kabhi kabhi kuch pics kuch kahen bina nahi chhodte peecha is pic ko dekha to likhe bina nahi raha gaya

  4. बेहतरीन लिखा है मैम!

    सादर

  5. बहुत ही बढ़िया सार्थक प्रस्तुति ….

  6. आदरणीय सोमा जी
    नमस्कार
    एक अरसे के बाद किसी जीवंत रचना से साक्षात्कार का अवसर मिला, कई विचार आते चले गए
    कुछ इस तरह से …..

    झुर्रिओं में छिपी हैं कई कथाएँ
    दबी हैं इनमें अनकही व्यथाएं
    मांग रहीं हैं विगत से हिसाब
    पढ़ सको यदि तुम ये किताब
    इनमें पाओगे अनागत का आभास
    इनमें अभी जीवंत है जीने की आस …….

    1. Wah Divyansh ji kitni sundarta se aap baat kah jaate hai..abhi bhi jeevant hai jeene ki aas
      wah soul stirring
      aap hamesha bahut protsahit karte hai
      Dhanyawaad 🙂

  7. बेहद सुन्दर रचना….|
    सच दादी की खामोश आखें कितनी बातें कहती हैं…|
    दादी के इस ह्रदय पसीजने वाले रूपांतर के लिए, मेरी ओर से आपके लिए :
    “जब सोमा लिखतीं हैं तब शब्दों को सौभाग्य मिल जाता है |
    कविता के माध्यम से वे मन को कुछ ऐसे छू लेती हैं मानो मन में घर ही बना लेती हैं !”

    1. Arey Lopa aap sharminda kar rahi hai…bas kabhi kuch likh leti hun par aap ki rachna dil ko prassanta se bhar deti hai
      Thanks 🙂

  8. एक सच यह भी है जिसे आपने शब्‍दों में पिरोया है … गहन भाव लिए हुए उत्‍कृष्‍ट लेखन …आभार

    1. Is margdharshan aur protsahan ke liye jitna bhi dhanyawaad kahu kam hi hoga par dil se saath banaye rakhne ke liye bahut bahut dhanyawaad 🙂

  9. ….लाज़वाब अहसास…दिल को छूती बहुत सुन्दर प्रस्तुति..

  10. बहुत ही सुन्दर रचना
    धन्यवाद
    अरुन
    (www.arunsblog.in)

  11. aap bahut hi umda likhti hain. Gambhir vichar aur ek khushnuma ahsaas ko sundar shabdon mein piroya hai. Padh kar protsahan milta hai. main bhi prayas karunga.

शब्दों की झप्पी

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