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यही तो है लोचा

                                      

जब  भी  कुछ  हो  जाता  है  बुरा

जब  भी  कोई  बजा  दे  बेसुरा

हम  लेते  है  गाँधी  जी  का  नाम  कहते  है

उन्होंने  ऐसा  तो  नहीं  होगा  सोचा

अरे  उन्होंने  गर  होता  भी  यह  सोचा

तो  भी  होता  यही  लोचा

राज  कर  रहे  भ्रष्ट , सब  जगह  बेईमानी

गुपचुप  बिकती  डॉलरों में  देश  की  कहानी

कोई  कुकर्मी  छूटा कोई  गया  पकड़ा

कोई  पैसे  के  दम  पर  गलत  बात  पर  अकड़ा

सरकार  और  ओपोज़िशन  के  नित  नए  नाटक

घूस  बिना  नहीं  खुलते  सरकारी  फाटक

ग्लोबल  वार्मिंग  ने  अलग  उड़ा रखे  है  होश

यह  ऊपर  से  नहीं  आया  हमारा  ही   है  दोष

उसपर  ओबामा  की  गुहार  भारत  ना  जाओ

भारतियों जितना पड़ो पर वह इलाज ना कराओ

खैर  उनकी  छोड़ो  जैसी  उनकी  विश

पर  यहाँ  आते  तो  पता  चलता

चिकन   टिक्का  नहीं  हमारा  नेशनल  डिश

आते  है  वापस  अपने  जन्मभूमि  पर  जिसका  है  बुरा  हाल

सब  तरफ  तबाही  फैली  जाने  कैसे  बीतेगा  यह  साल

सब  के  सब  घूम  रहे  हुए  बदहवास

गन्दा  मैला  पानी  और  ले  रहे  पोल्यूटेड  श्वास

कहा  तक  बचोगे  किस  किस  से  बचोगे , कब  जागोगे

सुधरो  और  सुधारो , अपनी  गलतियों  से  कब  तक  भागोगे

कल  होगा  तो  ना  कुछ  और  कर  पाओगे

वरना  वक़्त  से  पहले  सब  धुल  हो  जाओगे

नहीं ,  गाँधी  जी  ने  नहीं   यह  सब  सोचा

पर  हम  भी   नहीं  सोच  रहे  यही   तो  है  लोचा

छप्पन जी को हराना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है

छप्पन जी  का नाम ऐसा
क्योकि करते है वो  छप्पन  भोग
क्या करे भाग में ही
लिखा है उनके राजयोग
बड़ी कोशिश की सरकार ने
पर धन ना हुआ उनका कम
घूस ठूस ठूस कर खाते और
सब कर जाते हजम
लक्ष्मी  जी  भी  उनसे  रहती है
सदैव  प्रसन्न
जहा भी हाथ  लगाते है
वही पर उपजता है  धन
फिर एक दिन वे बोले जाना
है हमें तिहाड़
यह सुन कर मचा ऐसा शोर
जैसे गिरा हो कोई पहाड़
पूछा उनसे हमने
क्यों करते है ऐसा गज़ब
खुद से भी कोई जाता है जेल
आप के तो खेल ही अजब
बोले  छप्पन जी अरे तिहाड़
बन गया है एक बड़ा कोटेज इंडस्ट्री
और क्यों ना हो वहा  बैठी जो  है
लगभग सारी मिनिस्ट्री
हमें वहा मिल जाए एंट्री
तो कमाल हो जाए
अब तक बाहर कमाया
अब थोडा अन्दर भी हो जाए
अब सब तिहाड़ जाने के लिए
मचाये है हड़बड़ी
और छप्पन जी  के पीछे
घूम रहे है हर घड़ी
आपको मिलना हो तो आप भी बताये
        अरे क्या क्यों
जस्ट टू गेट एन  आईडिया सर जी

मुझे आने दो ना माँ

 

नहीं चाहिए पालने की डोल

,ना देना नरम बिछौना

,बस तेरे आँचल की छाँव,

बस तेरी गोदी का सुख,

यही है मेरी भूख ,

एक बार बस एक बार

 गले लगा कर तुझे  पुकारु  माँ

 मुझे अपनी बिटिया बन इस धरती पर आने दो न माँ

कहो न मेरे पक्ष मे कुछ

दो न मेरा साथ

एक बार सबसे लड़ कर मुझे आने दो अपने पास

कह दो मैं भी अंश तुम्हारी

जैसे बेटा वैसी ही बेटी कह दो सबसे नही करोगी भेदभाव

नही छीनोगी मेरे जीने का  अधीकार

माँ तू हैं ना मेरे साथ ?

सुना है अपने  अधिकारो के लिए कभी लड़ी नही

 पर अन्दर हिम्मत की कमी नही

 चुपचाप सब की सुनती आयी

पर आवाज की खनक जिन्दा हैं अब भी

एक पल अपने उस जीवन की  खनक

मुझसे भी बांटो न माँ

आज  अपनी उस  हिम्मत से मेरा साथ निभा दो माँ

 उसी माँ की बेटी बन आ जाने दो न माँ

एक बार बस इस बार

जाने कितनी सदियों से भटक रही

कि वापस भेज रहे है लोग

हर बार तेरी कोख मे आते  ही

तुझसे अलग हो रही मैं

जैसे की इन्सान नही, हूँ मैं कोई रोग

एक औरत  हो  मुझ पर  यह  सब तू  क्यों  सह  लेती है  माँ

तेरी चीखों तेरी आंसुओ की जहाँ कदर नही

ऐसे समाज की रीत इस बार बदल  के देख न माँ

एक बार अपनी सुन कर मुझे पास बुला ले माँ

मैं तेरी बिटिया, तेरी परछाई हूँ

एक बार अपनी इस रचना को खिलने दे ना माँ

एक बार अपनी आवाज कर बुलन्द

 अपने होने का करा अहसास

 बन्द दरवाजो को खोल

आंखों में आँखे डाल कर बोल

 मुझे दे दिलासा कि  धरती परबोझ नही हूँ मैं

 वादा कर मुझसे कि तू अब बिगुल बजाएगी

हर उस औरत, जिसे तेरी ज़रुरत हो उसका साथ निभाएगी

 दे अपनी  सखियों  का  साथ मिला  कर उनसे हाथ

 उठ कर   मांग न  अपना हक

एक बार बस एक बार  मुझे आने दे न माँ

माँ , ओ माँ, आ रही हूँ  न मैं ?

 

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