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इन असुयन की पीर

कब का संग  छोड़  गयी
होली और दिवाली
लाल रंग के संग
छोड़ गयी पीछे
पिंजर में बंद
आस और मोह
आज भी होता है दर्द
आज भी हसी खिलती है होटों पर
आज भी आते है सपने
आज भी है रंगों से प्यार
इतना दहेज़ दिया तो बापू
दे देते थोडा अक्षर  दान
हो लेने देते पाँव पर खड़ा
फिर करते डोली पर सवार
आज इस धड़कन की चीख
मुझ में टकराती रहती है
और कहती है
लड़की बन जन्मी
वही क्या कम था अपराध
अब तू विधवा
खोया भी तुने
और तू ही है एक श्राप

चौकीदार

 
 
गली गली घूम घूम कहता है चौकीदार
होशियार होशियार होशियार
 
वह जो सामने से आ रही है चीख
गिड़गिड़ाती, मांगती ज़िन्दगी की भीख
उन साँसों की आह सुन, बंद मत कर किवाड़
आगे बड़ हिम्मत जुटा,बहानों की मत ले आड़
 
गली गली घूम घूम कहता है चौकीदार
सुन पुकार सुन पुकार सुन पुकार
 
मौन रह कायर ना बन, कुछ तो बोल,
कब से सो रहा है तू ,जाग अब आँखों को खोल
ज़िन्दगी हो रही है तार तार
बोल किसका कर रहा तू इंतज़ार
 
गली गली घूम घूम कहता है चौकीदार
खोल द्वार खोल द्वार खोल द्वार
 
पीड़ित शर्मसार हो जी रहे नज़रे झुका
अन्याय चल रहा उजाले में सर उठा
उसको रोक, करने से और वार
हो तू अकेले या हो संग चार
 
गली गली घूम घूम कहता है चौकीदार
तेरी आज है दरकार है दरकार है दरकार
 
नया कोई गीत, गा नई एक धुन
शाख शाख पर खुशिया आज तू बुन
ला किसी जीवन में आज तू बहार
ना मान हार अब, कर प्रयास बार बार
 
गली गली घूम घूम कहता है चौकीदार
हो तैयार हो तैयार हो तैयार
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