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साहब की जय हो

यह रचना उन सभी साहब लोगो को समर्पित है जो इस दुनिया में भगवान् द्वारा डाईरेक्ट भेजे गए है…
इन्हें जन्म  लेने के लिए किसी तुच्छ मानव का सहारा नहीं लेना पड़ा
ऐसे नेता/अफसर/पडिंतो को मेरा साष्टांग प्रणाम
आप क्यों पूजा करते है सरकार
आप तो खुद ही देवता है
भगवान्  से ज्यादा जात पात पर मन लगाना
मंत्र कम गालियों का ज्यादा जाप करना
इसका धर्म-उसका कर्म, मन में इतनी कड़वाहट
आप क्यों कष्ट करते है सरकार
आप तो खुद ही देवता है
*
बात बात पर लोगो  को झिड़कना
रात दिन सबपर पर हुकुम चलाना
आप दुनिया का नहीं, दुनिया आपका हिस्सा है
बड़े बड़े अफसर आपके जूते चमकाएं
आप को क्यों चाहिए आशीर्वाद सरकार
आप तो खुद ही देवता है
*
रहनें  दें  यह अगरबत्तियों और मालाओं का खेल
ये धूप बताशो घंटियों की रेल पेल
कल से अपनी मूर्ती को दीजिये ये उपहार
या फिर आइने के सामने खड़े हो
अपनी ही आरती लीजिये उतार
आप ऐसा ही कीजिये सरकार
आप तो खुद ही देवता है
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माया बड़ी ठगनी

माया की माया नगरी में      
सब कुछ बड़ा कमाल
चोर लुटेरे राज कर रहे
नित नए होते धमाल
                     सड़क खुदी बरसो से
                     और नहरे है खाली
                    पुलिस प्रशासन नदारद
                     उपवन लूटे माली
वैसे तो यू पी में
होते रहते है दंगल
पर उन सब में अनोखा
एक ही है गजब का जंगल
                      माया जी की महिमा
                    मूर्तियों में समायी
                    नगर प्रशासन सो रहे
                   अर्थ व्यवस्था धराशायी
जीजी की जी हजूरी में
सब हो रहा बरबाद
अगर ना हो विश्वास
आ जाओ  गाज़ियाबाद

यही तो है लोचा

                                      

जब  भी  कुछ  हो  जाता  है  बुरा

जब  भी  कोई  बजा  दे  बेसुरा

हम  लेते  है  गाँधी  जी  का  नाम  कहते  है

उन्होंने  ऐसा  तो  नहीं  होगा  सोचा

अरे  उन्होंने  गर  होता  भी  यह  सोचा

तो  भी  होता  यही  लोचा

राज  कर  रहे  भ्रष्ट , सब  जगह  बेईमानी

गुपचुप  बिकती  डॉलरों में  देश  की  कहानी

कोई  कुकर्मी  छूटा कोई  गया  पकड़ा

कोई  पैसे  के  दम  पर  गलत  बात  पर  अकड़ा

सरकार  और  ओपोज़िशन  के  नित  नए  नाटक

घूस  बिना  नहीं  खुलते  सरकारी  फाटक

ग्लोबल  वार्मिंग  ने  अलग  उड़ा रखे  है  होश

यह  ऊपर  से  नहीं  आया  हमारा  ही   है  दोष

उसपर  ओबामा  की  गुहार  भारत  ना  जाओ

भारतियों जितना पड़ो पर वह इलाज ना कराओ

खैर  उनकी  छोड़ो  जैसी  उनकी  विश

पर  यहाँ  आते  तो  पता  चलता

चिकन   टिक्का  नहीं  हमारा  नेशनल  डिश

आते  है  वापस  अपने  जन्मभूमि  पर  जिसका  है  बुरा  हाल

सब  तरफ  तबाही  फैली  जाने  कैसे  बीतेगा  यह  साल

सब  के  सब  घूम  रहे  हुए  बदहवास

गन्दा  मैला  पानी  और  ले  रहे  पोल्यूटेड  श्वास

कहा  तक  बचोगे  किस  किस  से  बचोगे , कब  जागोगे

सुधरो  और  सुधारो , अपनी  गलतियों  से  कब  तक  भागोगे

कल  होगा  तो  ना  कुछ  और  कर  पाओगे

वरना  वक़्त  से  पहले  सब  धुल  हो  जाओगे

नहीं ,  गाँधी  जी  ने  नहीं   यह  सब  सोचा

पर  हम  भी   नहीं  सोच  रहे  यही   तो  है  लोचा

छप्पन जी को हराना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है

छप्पन जी  का नाम ऐसा
क्योकि करते है वो  छप्पन  भोग
क्या करे भाग में ही
लिखा है उनके राजयोग
बड़ी कोशिश की सरकार ने
पर धन ना हुआ उनका कम
घूस ठूस ठूस कर खाते और
सब कर जाते हजम
लक्ष्मी  जी  भी  उनसे  रहती है
सदैव  प्रसन्न
जहा भी हाथ  लगाते है
वही पर उपजता है  धन
फिर एक दिन वे बोले जाना
है हमें तिहाड़
यह सुन कर मचा ऐसा शोर
जैसे गिरा हो कोई पहाड़
पूछा उनसे हमने
क्यों करते है ऐसा गज़ब
खुद से भी कोई जाता है जेल
आप के तो खेल ही अजब
बोले  छप्पन जी अरे तिहाड़
बन गया है एक बड़ा कोटेज इंडस्ट्री
और क्यों ना हो वहा  बैठी जो  है
लगभग सारी मिनिस्ट्री
हमें वहा मिल जाए एंट्री
तो कमाल हो जाए
अब तक बाहर कमाया
अब थोडा अन्दर भी हो जाए
अब सब तिहाड़ जाने के लिए
मचाये है हड़बड़ी
और छप्पन जी  के पीछे
घूम रहे है हर घड़ी
आपको मिलना हो तो आप भी बताये
        अरे क्या क्यों
जस्ट टू गेट एन  आईडिया सर जी

एक बंगला बने न्यारा

कल बड़े दिनों बाद बाज़ार में मिले संकटा बाबू
मिलते ही उन्होंने ने कहा काम से गए थे आबू
मैंने पूछा कैसे है सर आज कल दिखते ही नहीं
कई दिनों से ब्लाग आपका सूना पड़ा कुछ लिखते भी नहीं
संकटा बाबू बोले कि क्या कहें  सिचुएशन  है काम्प्लेक्स
होम लोन ने मार रखा है मुश्किल में है मेरे सपनो का ड्यूप्लेक्स
लोगो को तो सिर्फ दिखता है जो भी उपरी मैंने  कमाया
सोचते होंगे मुझे क्या चिंता मैंने तो बहुत  होगा जमाया
जानते है ऊपर का पैसा कैसे नीचे दबा कर रखना पड़ता है
क्योकि यह आईटी वालो कि आँखों में यह बहुत  जल्द अड़ता  है
ऊपर से सारे गोरख धंदे वाले जिस गति से तिहाड़ भर रहे है
उसी डर से मेरे सारे ऐसे वैसे पैसे दीवान में सड़ रहे है
यही मनाता हूँ कि कही कोई बुला ना ले दिल्ली
सुना है अच्छे अच्छे शेर वहां  हो जाते है भीगी बिल्ली
बढते ई ऍम आई ने ऐसी बजा राखी है बैंड
घर पूरा करना हो तो मिलानी पड़ेगी  सीमेंट में और ज्यादा सैंड
गया था आबू कि कही से हो जाए कुछ जुगाड़
और  इस महंगाई की कुछ कम हो जाए दहाड़
पर लक्ष्मी जी भी आज कल किसी की नहीं सुन रहीं
बढते महंगाई से बचा सके लगता है ऐसी कोई धुन नहीं
संकटा बाबू की इतनी और ऐसी बातें सुन मैं रह गयी स्तब्ध
क्या कहू,सांत्वना दू या सलाह, नहीं मिल रहे थे शब्द
कमाई उपरी हो या सीधी सब का हो रखा है  बुरा हाल
आर्थिक मंदी का दौर बड़ा बुरा जा रहा है  यह साल
हम सब तो अब तक  यही सोचते थे संकटा बाबू के क्या ठाठ
पर लगता है कैसे भी कमाओ सरकार दे ही देती है सबको मात
इसी लिए इस धनतेरस पर लक्ष्मी जी कि की जम के पूजा
और कहा माता एक घर बन जाए इसी आमदनी में मांगू वरदान  ना दूजा
~सोमा मुखर्जी ( सोमकृत्य)

महंगा डाक्टर चंगा डाक्टर

जो डाक्टर बात बात पर सुई ना लगाए
उसकी दी दवा  कौन खाए
जिसने ना घंटे भर मरीज़ को तपासा
उससे क्या रखे कोई आशा
 लम्बा बिल,एम् आर आई, ई सी जी, एक आध स्टेंट
तब जा कर लगता है हुआ है ट्रीटमेंट
इज्ज़त  तो महंगे डाक्टर से इलाज कराने में ही है
इन्ही सब से ही तो पता चलता है की आप भी किस कमाल के घराने से है
बड़े अस्पताल में ज्यादा पैसे देकर लोग कितने शान से निकलते है
वहा की दी दवाइयों को कितने गर्व और प्यार ने निगलते है
सस्ता डाक्टर कितना भी अच्छा हो
अपनी बात का कितना भी सच्चा हो
उसे दिखा कर सिर्फ होता है नाम खराब
जैसे अच्छे  कपड़ो में पहनी हो फटी जुराब
लोग तो यही कहेंगे की साहब आप तो अच्छा कमाते है
फिर महंगे डाक्टर से क्यों घबराते है
महंगा  डाक्टर दिल की बात समझता है
कोई बड़ी सी बीमारी बता कर लाज रख लेता है
तलाश है ऐसे ही एक महंगे डाक्टर की
जो मेरा हर कंप्लेंट
महंगे इलाज से करे एक्सप्लेन
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